जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)
जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)

हेलो दोस्तों हमारे इस ब्लॉक में आपका स्वागत है, आज हम आपको बताएंगे कि जीव विज्ञान क्या है (Biology kya hai) और जीवन क्या है, (Jivan kya hai) तथा जीवधारी निर्जीव वस्तुओं से कैसे भिन्न है, और आधुनिक जीव विज्ञान क्या है तथा प्रकृति का संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)

 

जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)
जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)

 

जीव विज्ञान क्या है? (Biology kya hai)

जीवों के अध्ययन को सन् 1802 मैं पहले फ्रांसीसी वैज्ञानिक लैमार्क ( Lamarck) लैमार्क ने तथा बाद में जर्मन विज्ञानिक ट्रेविरैनस ( Treviranus ) ने जीव विज्ञान ( Life science or biology ) का नाम दिया। आज हमें पृथ्वी पर उपस्थित जीवों की लगभग 17 से 18 लाख जातियां ज्ञात है इनमें हम जंतुओं और पादपों का स्पष्ट भेद कर सकते हैं इसलिए जीव विज्ञान को दो भागों में बांटा गया है पादप और वनस्पति विज्ञान अर्थात बांटनी और जंतु विज्ञान।

जीवन क्या है? (Jivan kya hai)

हम लोग जीव धारियों तथा समस्त निर्जीव वस्तुओं को देख तथा छू सकते हैं, परंतु जीव धारियों के जीवन को ना देख सकते हैं ना छू सकते हैं वास्तव में जीवन जीव धारियों के पदार्थ में उत्पन्न होने वाली एक विशेष प्रकार की ऊर्जा या सकती है, अतः इसके कोई सीधी परिभाषा नहीं दी जा सकती प्यार लालच सरलता सुशीलता अच्छाई बुराई आज की बात यह अमूर्त या भाववाची है, हम केवल इतना कह सकते हैं कि संगठित पदार्थ सजीव पदार्थ या भूत द्रव्य की जैव दशा ही जीवन है ।

जीवधारी निर्जीव वस्तुओं से कैसे भिन्न है (How living beings differ from nonliving objects)

यद्यपि जीवधारी तथा सभी निर्जीव वस्तुएं पदार्थ की बनी होती हैं और हम जीवन को देख या छू नहीं सकते हैं फिर भी हम सुगमतापूर्वक जीव धारियों की निर्जीव वस्तुओं से पृथक पहचान कर लेते हैं इसका कारण यह है कि जीव धारियों से पदार्थ का संगठन ऐसा होता है जिसमें की जैव ऊर्जा ( bioenergy ) बनती है इसी ऊर्जा द्वारा जीवधारी कई प्रकार की जैव क्रियाएं (vital activities) करते हैं ।

आकृति एवं माप ( Shape and size)

जीवों में अपनी-अपनी जाति के अनुसार विभिन्न प्रकार की परंतु निश्चित आकृति एवं माप होते हैं इसलिए हम इन्हें अलग-अलग पहचान लेते हैं ।

गमन एवं जाति ( Locomotion and movement )

जीवो में उपापचय के अंतर्गत स्वयं अपने शरीर की कोशिकाओं में पोषक पदार्थों के दहन या जारण से उत्पन्न ऊर्जा द्वारा सुरक्षा भोजन की खोज आदि के लिए अपने इच्छानुसार स्वतंत्र विचरण का गुण होता है रेल का इंजन निर्जीव होते हुए भी चलता है परंतु स्वयं अपनी शाक्ति और इच्छा से नहीं कोयले और जल से बनी वाष्प की ऊर्जा डीजल की ऊर्जा या विद्युत ऊर्जा द्वारा चालक के अनुसार पूरे शरीर द्वारा स्थान परिवर्तन का गमन ( Locomotion) तथा शरीर के अंग के हिलने डुलने की क्रिया को गति ( movement) कहते हैं ।

आधुनिक जीव विज्ञान (Aadhunik Jeev Vigyan)

वर्तमान युग में वैज्ञानिकों ने अनेक नए- नए यंत्रों के उपकरणों का आविष्कार तथा अन्वेषण ( researchers ) की अनेक नवीन विधियों (techniques ) का विकास करके जीवों के संबंध में हमारे ज्ञान में अभूतपूर्व वृद्धि की है इस नए ज्ञान की भूमिका में आधुनिक जीव विज्ञान में कुछ व्यापक एकीकरण ( general unifying ) सिद्धांतों को बहुत मानता दी जाती है ऐसे प्रमुख सिद्धांत निम्नवत हैं ।

1. संघठन का सिद्धांत (Sangathan Ka Siddhant)

इसके अनुसार जीवन से संबंधित सारी प्रक्रियाएं रासायनिक एवं भौतिक सिद्धांतों पर आधारित है दूसरे शब्दों में जैव क्रियाएं जीव पदार्थ के घटकों पर नहीं इसके भौतिक और रासायनिक संगठन पर निर्भर करती है यदि हमें इस संगठन का पूरा ज्ञान हो जाए तो हम परखनली में जीव की उत्पत्ति कर सकते हैं ।

2. एंजाइम मत (Enzyme Theory )

प्रत्येक जीव कोशिका में प्रतिपल हजारों रासायनिक अभिक्रियाएं होती रहती हैं इन्हें सामूहिक रूप से कोशिका का उपापचय कहते हैं प्रत्येक अभिक्रिया एक विशेष कार्बनिक उत्प्रेरक की मध्यस्थता के कारण सक्रिय होकर पूरी होती है ।

प्रकृति का जैव संतुलन ( biotic balance of nature )

गत सदी के एक जीव विज्ञान ने कहा इंगलिस्तान की समृद्धि यहां की बूढ़ी दाइयों के कारण है, उसने कहा स्वस्थ अंग्रेज ढोरो का मांस खाते हैं घास का परागण मक्खियां करती है, मक्खियों के बसेरों को खेत के चूहे नष्ट करते हैं, और खेत के चूहों की संख्या बिल्लियों की संख्या पर निर्भर करती है, जिन्हें बूढ़ी दाइयां या पालती है अर्थात बूढ़ी दाइयों की संख्या का प्रभाव मांस की उपलब्धित पर पड़ता है तथा अपने अपने क्षेत्र में सभी जीवों का अन्य जीवों के साथ एक निश्चित संबंध रहता है, अर्थात प्रत्येक जीव के जीवन पर अन्य जीवों का प्रभाव पड़ता है इसलिए प्रकृति को हम एक विशाल जैव समाज कह सकते हैं।

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