उपास्थि क्या है? (हिंदी में जाने) । Cartilage In Hindi

उपास्थि । Cartilage In Hindi

हेलो दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। हमारे इस ब्लॉग में आपको उपास्थि क्या है? । Cartilage In Hindi के साथ – साथ उपास्थि के प्रकार एवं उपास्थि तथा अस्थि में समानता, उपास्थि और अस्थि में अंतर, अस्थियों के प्रमुख रोग आदि के बारे में बताएंगे, तो दोस्तों एक एक करके इन सबके बारे में जानते है।

उपास्थि । Cartilage In Hindi
उपास्थि । Cartilage In Hindi

उपास्थि क्या है? । Cartilage In Hindi

उपास्थि एक प्रकार का संयोजी ऊतक होता है, जिसकी आधात्री एक अर्धठोस, लचीले और पारदर्शक ग्लाइकोप्रोटीन कॉण्ड्रिन की बनी होती है। इसी कारण इसकी आधात्री थोड़ी कड़ी होती है। आधात्री के बीच-बीच में खाली स्थान या छोटी थैलियाँ पायी जाती हैं, जिन्हें गर्तिकाएँ या लैकुनी कहते हैं। इनमें एक प्रकार का तरल पदार्थ भरा होता है। प्रत्येक लैकुनी में एक से चार तक जीवित कोशिकाएँ पायी जाती हैं जिन्हें कॉण्ड्रियोब्लास्ट या कॉण्ड्रियोसाइट कहते हैं। ये ही कोशिकाएँ कॉण्ड्रिन का स्रावण करती हैं और स्वयं विभाजित होकर संख्या में बढ़ती हैं तथा स्वयं की गर्तिका बनाती हैं जिसके कारण उपास्थि में वृद्धि होती है। उपास्थि के आधात्री में कॉण्ड्रियोसाइट्स के अतिरिक्त कोलेजन तथा इलास्टीन तन्तु भी पाये जाते हैं। उपास्थि की बाहरी सतह पर एक सुदृढ़, पतली तथा तन्तुमय झिल्ली पायी जाती है, जिससे होकर भोज्य पदार्थ उपास्थि कोशिकाओं तक पहुँचता है। इस झिल्ली को पर्युपास्थि या पेरीकॉण्ड्रियम कहते हैं। इसमें अनेक महीन रक्त केशिकाएँ पायी जाती हैं।

उपास्थि के प्रकार । Types of Cartilage In Hindi

(1) काचाभ उपास्थि (Hyaline Cartilage)

इसकी कॉण्ड्रिन स्वच्छ, अर्ध पारदर्शक, हल्के नीले रंग की होती है। इसमें तन्तु अनुपस्थित रहते हैं। काचाभ उपास्थि लचीली होती है। यह श्वासनली, हायऑइड, स्टर्नम तथा पसलियों के सिरे पर पायी जाती है। यह हड्डियों पर आये हुए धक्कों को लचीली होने के कारण सह लेती है।

(2) रेशेदार उपास्थि (Fibrous Cartilage)

इसके आधात्री में कॉण्डियोब्लास्ट्स के अलावा अनेक कोलेजन तन्तुओं के गुच्छे पाये जाते हैं जिसके कारण यह उपास्थि अधिक मजबूत हो जाती है। हमारे शरीर को कशेरुकाओं के बीच स्थित अन्तरकशेरुक गरियाँ रेशेदार उपास्थि की ही बनी होती है तथा कसैरकाओं पर आये हुए धक्कों की रोककर फरकाओं की रक्षा करती हैं।

(3) लचीली उपास्थि (Elastic Cartilage)

यह रेशेदार उपास्थि की ही तरह होती है लेकिन इसके आधात्री में कोलेजन तन्तुओं के स्थान पर पीले लचीले इलास्टीन तन्तुओं का जाल पाया जाता है, जिससे यह उपास्थि काफी लचीली होती है। यह उपास्थि हमारे कान, नाक के सिरे पर तथा इपिग्लॉटिस में पायी जाती है।

(4) कैल्सीफाइड उपास्थि (Calcified Cartilage)

यह उपास्थि हायलिन उपास्थि के ही समान होती है, लेकिन बाद में इसमें कैल्सियम के लवण जमा हो जाते हैं, जिससे इसका लचीलापन समाप्त हो जाता है तथा यह हड़ियों के समान कठोर हो जाती है।” यह उपास्थि मेढक की श्रोणि मेखला, प्यूबिस, अंश मेखला की सुप्रास्कैपुला तथा फीमर व ह्यूमरस के दोनों सिरों पर पाय जाती है।

उपास्थि तथा अस्थि में समानता । Similarities of Cartilage and Bone In Hindi

  • (1) अस्थि तथा उपास्थि दोनों की बाहरी सतह पर एक आवरण पाया जाता है।
  • (2) दोनों में ही आधात्री पायी जाती हैं, जिसमें कोशिकाएँ। बिखरी होती हैं।
  • (3) दोनों ही शरीर का आधार (ढाँचा) बनाते हैं।
  • (4) दोनों ही को कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण मजबूत बनाते हैं।

उपास्थि और अस्थि में अंतर । Difference Between Cartilage and Bone in Hindi

उपास्थि अस्थि
इसका METRIX अर्द्ध ठोस होता है, जिसके कारण यह लचीली होती है।इसका मैट्रिक्स ठोस होता है, जिसके कारण यह कठोर होता है।
इसका METRIX कोन्ड्रिन नामक PROTIN का बना होता है।इसका मैट्रिक्स ओसीन नामक प्रोटीन का बना होता है।
एक गर्तिका में 1-4 कोशिकाएं स्थित होती हैं।एक लैकुनी में एक ही कोशिका स्थित होती है।
इसकी कोशिकाओं की संख्या इन्हीं के विभाजन से बढ़ती हैं।इनकी कोशिकाएँ विभाजित नहीं होतीं है ये ऑस्टियोच्लास्ट के विभाजन से बनती हैं।
इनकी कोशिकाओं में प्रवर्ध नहीं पाये जाते हैं।इनको कोशिकाओं में प्रवर्ध पाये जाते हैं।
इनमें रुधिर कणिकाएँ नहीं बनती हैं।इनमें रुधिर कणिकाएँ बनती हैं।

अस्थियों के प्रमुख रोग । Bone Disease in Hindi

(1) मोच (Sprain)

जब सन्धि को मजबूती प्रदान करने वाले लिगामेण्ट्स या स्नायु आवश्यकता से अधिक खिंच या मुड़ जाते हैं तो में टूट जाते हैं इस स्थिति को मोच आना कहते हैं। जब स्नायु (Ligaments) टूट जाते हैं तब अस्थियां अपने स्थान से खिसक जाती हैं। इस स्थिति को सन्धि भंग कहते हैं।

(2) आर्द्राइटिस (Arthritis)

कभी-कभी सन्धि बनाने वालो उपास्थियों पर उपास्थि निर्माण या सिनोवियल द्रव की कमी के कारण सन्थि में सूजन आ जाती है, इस स्थिति को आर्द्राइटिस बीमारी कहते हैं। यह स्थिति यूरिक अम्ल के क्रिस्टलों के जमाव के कारण भी पैदा होता है। इस बीमारी में सन्धियों पर तीखा दर्द होता है।

(2) ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)

इस रोग में अस्थियाँ गलकर कोमल, कमजोर एवं भंगुर हो जाती है।

दोस्तों, आज हमने आपको उपास्थि क्या है? । Cartilage In Hindi के साथ – साथ उपास्थि के प्रकार एवं उपास्थि तथा अस्थि में समानता, उपास्थि और अस्थि में अंतर, अस्थियों के प्रमुख रोग, आदि के बारे मे बताया, आशा करता हूँ आपको यह आर्टिकल बहुत पसंद आया होगा, तो दोस्तों मुझे अपनी राय कमेंट करके अवश्य बताये, धन्यवाद्.

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