मगध साम्राज्य ( Magadha Empire )

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हेलो दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, हमारे इस ब्लॉग में आपको मगध साम्राज्य का सम्पूर्ण इतिहास (हिंदी में) । Magadha Empire In Hindi, सिकन्दर, मौर्य सामाज्य (Maurya Society in hindi), बिन्दुसार, अशोक, गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire in hindi) आदि ये सब पढ़ने को मिलेगा।

मगध साम्राज्य । Magadha Empire In Hindi

 

मगध साम्राज्य । Magadha Empire In Hindi
मगध साम्राज्य । Magadha Empire In Hindi

मगध साम्राज्य का सम्पूर्ण इतिहास । Magadha Empire In Hindi

मगध के सबसे प्राचीन वंश संस्थापक वृहद्रथ था।

इसकी राजधानी गिरिब्रज (राजगृह) थी।

जरासंध वृहद्रथ का पुत्र था।

हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार था, जो मगध की गद्दी पर 544 ई. पू. में बैठा था।

वह बौद्ध धर्म का अनुयायी था।

यह प्रथम भारतीय राजा था जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर दिया।

बिम्बिसार ने बृहद्रथ हराकर अंग राज्य को मगध में मिला में मिला लिया।

इसने राजगृह का निर्माण कर उसे अपनी राजधानी बनाया।

बिम्बिसार ने मगध पर करीब 52 वर्षो तक शासन किया।

इसकी हत्या उसके पुत्र अजातशत्रु ने कर दी थी और वह 493 ई. पूर्व मर मगध की गद्दी पर बैठा।

अजातशत्रु का उपनाम कुणिक था।

यह प्रारम्भ से जैन धर्म का अनुयायी था।

अजातशत्रु ने 32 वर्षों तक मगध पर शासन किया।

461 ई. पू. में अपने पिता की हत्या कर उदायिन मगध की गद्दी पर बैठा।

हर्यक वंश का अंतिम राजा उदायिन का पुत्र नागदशक था।

नागदशक को उसके अमात्य शिशुनाग ने 412 ईसा पू में अपदस्थ करके मगध पर शिशुनाग वंश की स्थापना की।

इसने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र से हटाकर वैशाली में स्थापित की।

शिशुनाग वंश का अंतिम राजा नंदिवर्धन था।

नंद वंश का संस्थापक महापद्मनंद था।

नंदवंश का अंतिम शासक घनानन्द था।

यह सिकन्दर का समकालीन था।

सिकंदर कौन था? Sikandar History In Hindi

सिकन्दर का जन्म 356 ई. पूर्व में हुआ।

सिकंदर के पिता का नाम फिलिप था।

यह अरस्तु का शिष्य था।

इसने भारत-विजय का अभियान 326 ई. पूर्व में प्रारम्भ किया।

सिकंदर का सेनापति सेल्यूकस निकेटर था।

इनकी मृत्यु 323 ई. पूर्व में बेबीलोन में 33 वर्ष की अवस्था में हो गयी।

इसका जल सेनापति निर्याकस था।

सिकन्दर का प्रिय घोड़ा बाउकेफला था।

मौर्य साम्राज्य Morya Samrajya In Hindi

मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य था।

इसका जन्म 345 ई. पू में हुआ था।

जस्टिन ने चन्द्रगुप्त मौर्य को सेंड्रोकोट्स कहा है, जिसकी पहचान विलियम जोन्स ने चन्द्रगुप्त मौर्य से की हैं।

चन्द्रगुप्त मगध की राजगद्दी पर 322 ई. पूर्व में बैठा।

यह जैन धर्म का अनुयायी था।

चन्द्रगुप्त ने 305 ई. पूर्व में सेल्यूकस निकेटर को हराया था।

मेगस्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त के दरबार में  रहता था।

इसके [मेगस्थनीज] द्वारा लिखी गयी पुस्तक इंडिका है।

चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 298 ई. पूर्व में श्रवणबेलगोला में उपवास द्वारा हुयी।

बिन्दुसार कौन था? Bindusar History In Hindi
 
चन्द्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी बिन्दुसार हुआ जो 298 ई. पूर्व में मगध की राजगद्दी पर बैठा था
 
अमित्रघात के नाम से बिन्दुसार जाना जाता है।
 
अमित्र घात का अर्थ – शत्रु विनाशक।
 
बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था।
 
जैन ग्रंथो के अनुसार बिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया है।

अशोक कौन था?Ashok History In Hindi

बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक हुआ जो 269 ई. पूर्व में मगध की राजगद्दी पर बैठा।

राजगद्दी पर बैठने के समय अशोक अवन्ति का राज्यपाल था।

मास्की एवं गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिलता है।

पुराणों में अशोक को अशोकवर्धन कहा गया।

अशोक ने बौद्ध धर्म प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।

इसने 84000 स्पूपो का निर्माण किया था।

भारत में शिलालेख का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया।

अशोक के अभिलेख पढ़ने में सबसे पहली सफलता 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप को हुयी।

इसके स्तम्भ लेखो की संख्या 7 है।

कौशाम्बी अभिलेख को रानी का अभिलेख कहा जाता है।

इसका 7 वा अभिलेख सबसे लम्बा है।

अशोक का सबसे छोटा अभिलेख रउम्मीदेई है।

मौर्य शासक 137 वर्षों तक रहा।

मौर्यवंश का अंतिम शासक वृहद्रथ था, जिसकी हत्या इसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी थी।

ब्राह्मण साम्राज्य Brahman Samrajya In Hindi

शुंग एवं कण्व राजवंश Sung vansh In Hindi

पुष्यमित्र शुंग ने शुंग एवं कण्व राजवंश की नीव डाली।

शुंग शासको ने अपनी राजधानी विदिशा में स्थापित की।

पुष्यमित्र शुंग ने 2 बार अश्वमेध यग किया।

भरहुत स्तूप का निर्माण पुष्यमित्र शुंग ने करवाया।

शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था।

कण्व वंश का अंतिम राजा सुशर्मा हुआ।

सातवाहन राजवंश Satvahan Vansh in Hindi

शिमुख ने 60 ई. पूर्व में सुशर्मा की हत्या कर दी और सातवाहन राजवंश की स्थापना की।

इन्होने ने अपनी राजधानी प्रतिष्ठान में स्थापित की।

सातवाहन वंश के प्रमुख राजा – सिमुक, शातकर्णि, गौतमीपुत्र शातकर्णि, वशिष्ठीपुत्र, पुलुमावी तथा यज्ञ श्री शातकर्णि थे।

इन सातवाहन शाशको ने चाँदी , ताँबे , सीसा , पोटीन और काँसे की मुद्राओ का प्रचलन किया।

सातवाहन के समय सर्वाधिक सिक्के सीसा के ही थे।

ब्राह्मणो को भूमि अनुदान देने की प्रथा को आरम्भ सातवाहन सासको ने ही किया।

सातवाहन की राजकीय भाषा प्राकृत एवं लिपि ब्राह्मी थी।

कुषाण वंश । Kushan Vansh in Hindi

कुषाण वंश के संस्थापक कुजुल कडफिसेस था

इस वंश का सबसे प्रतापी राजा कनिष्क था।

इसकी राजधानी पेशावर थी।

कनिष्क ने ७८ ई. में एक संवत चलाया जो शक-संवत कहलाया।

इसका राजवैद्य आयुर्वेद का विख्यात विद्वान चरक था, जिसे चरकसहिंता की रचना की।

महाविभाष सूत्र के रचनाकार वसुमित्र है, इसे ही बौद्ध धर्म का विश्वःकोश कहा जाता है।

भारत का आइंस्टाइन नागार्जुन को कहा जाता है।

कनिष्क की मृत्यु 102 ई. में हो गयी थी।

इस वंश का अंतिम शासक वासुदेव था।

गुप्त साम्राज्य का इतिहास Gupt Vansh In Hindi

गुप्त वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था।

श्रीगुप्त का उतराधिकारी घटोत्कच हुआ।

गुप्त वंश का प्रथम महान सम्राट चन्द्रगुप्त प्रथम था, जो ३२० ई. में गद्दी पर बैठा।

इसने ही महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी।

गुप्त संवत की शुरुवात चन्द्रगुप्त प्रथम ने की।

चन्द्रगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी समुद्रगुप्त हुआ जो ३३५ ई. में राजगद्दी पर बैठा।

इसे ही भारत का नेपोलियन कहा जाता है।

इसे कविराज भी कहा जाता हैं।

समुद्रगुप्त विष्णु का उपासक था।

यह संगीत प्रेमी भी था।

समुद्रगुप्त का दरबारी कवि हरिषेण था।

इसका उतराधिकारी चन्द्रगुप्त-2 हुआ जो 380 ई. में राजगद्दी पर बैठा।

इसके चन्द्रगुप्त २ के शासनकाल में ही चीनी यात्री फाहियान भारत आया।

चन्द्रगुप्त-२ का उत्तराधिकारी कुमारगुप्त-१ हुआ।

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त ने की थी।

कुमारगुप्त-१ का उत्तराधिकारी स्कन्धगुप्त हुआ।

स्कन्धगुप्त ने गिरनार पर्वत पर स्थित सुदर्शन छील का पुनरुद्दार किया।

इसके शासनकाल में ही हूणों का आक्रमण शुरू हो गया।

अंतिम गुप्त शासक विष्णुगुप्त था।

संस्कृत गुप्त राजाओ की शासकीय भाषा थी।

गुप्तकाल में चाँदी के सिक्के को रूप्यका कहा जाता था।

मंदिर बनाने की कला का जन्म गुप्तकाल में ही हुआ।

मगध साम्राज्य के महत्वपूर्ण तथ्य

मगध के सबसे प्राचीन वंश के संस्थापक वृहद्रथ थे।

सिकंदर महान की मृत्यु 323 ई. पू. बेबीलोन [इराक] में हुयी।

सिकंदर ने भारत पर आक्रमण 326 ई. पू. में किया।

उज्जैन का प्राचीन नाम अवन्ति था।

प्राचीन भारत में पहला विदेशी आक्रमण ईरानियों ने किया था।

भारत में मुद्रा का प्रचलन 600 ई. पू. हुआ।

हर्यक वंश शासक अजातशत्रु ने राज्यारोहण के लिए अपने पिता की हत्या कर दी थी।

भारत पर पहला यूरोपीय आक्रमण यूनानियों ने किया था।

अजातशत्रु बौद्ध धर्म को मानता था, उसकी हत्या उदायिन ने की थी।

मौर्यकाल । Morya Samrajya in Hindi

सबसे प्राचीनतम राजवंश मौर्य वंश था।

मौर्य वंश की स्थापना 322 ई. में की गयी।

चंदगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री कौटिल्य [विष्णुगुप्त,चाणक्य] था।

कौटिल्य की तुलना मेकियावेली के प्रिंस से की जाती है।

बिन्दुसार ने विद्रोहियो को कुचलने के लिए अशोक को तकशिला भेजा।

अशोक को देवानं प्रियदर्शी की उपाधि दी गयी।

कलिंग का युद्ध 261 ई. पू. में हुआ।

मौर्य सामाज्य में पण मुद्रा प्रचलित थी।

इस काल में तक्छशिला प्रसिद्ध शिक्षा का केंद्र था।

सेल्यूकस द्वारा भेजा गया राजदूत मेगस्थनीज था, जिसने उसकी पुस्तक इंडिका में भारतीय समाज को पाँच भागो में बाँटा था।

भाब्रु स्तम्भ में अशोक ने स्वयं  मगध का सम्राट कहा।

कलिंग युद्ध का वर्णन 13 वे  शिलालेख में है।

इसके शिलालेख को पढ़ने वाला प्रथम अंग्रेज जेम्स प्रिंसेप था।

अशोक के व्यक्तिगत नाम का उल्लेख मास्की अभिलेख में मिलता है।

इसने उसके पुत्र व पुत्री को बौद्ध धर्म प्रचार हेतु श्रीलंका भेजा था।

चाणक्य तकशिला विश्वविद्यालय में शिक्षक थे।

अंतिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ थे इसकी हत्या पुष्यामित्र शुंग ने की थी।

भारत का आइंस्टीन नागार्जुन को कहा जाता है।

महाविभाषा शास्त्र ग्रंथ को बौद्ध धर्म का विश्वकोष कहा जाता है।

खारवेल चेदि वंश का संस्थापक था।

गुप्तकाल Gupt Samrajya in Hindi

गुप्तवंश की स्थापना 319 ई. में चन्द्रगुप्त 1 द्वारा की गई।

आर्यभट्ट वैज्ञानिक व गणितज्ञ गुप्तकाल में था।

गुप्त शासक स्कंदगुप्त के काल में हुणो ने आक्रमण किया था।

गुप्त वंश कला व स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध था।

कालिदास चन्द्रगुप्त 2 [विक्रमादित्य] के दरबारी कवि थे।

एरण अभिलेख भानुगुप्त से सबंधित है इसी अभिलेख में सतीप्रथा का प्रथम अभिलेख है।

भारतीय संस्कृति का स्वर्ण युग गुप्त युग को कहते है।

समुन्द्रगुप्त को कविराजभारत का नेपोलियन कहा जाता है।

हरिषेण समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था।

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त गुप्त में की गयी।

बाल विवाह प्रथा गुप्त युग में प्रारम्भ हुयी।

गुप्त कल में प्रमुख शिक्षा केंद्र पाटलिपुत्र, उज्जैयिनी थे।

पुष्यभूति वंश । Pushyabhuti vansh In Hindi

पुष्यभूति वंश की स्थापना पुष्यभूतिवर्धन ने की।

हर्षवर्धन का राजदरबारी कवि वाणभट्ट था।

चीनी यात्री ह्वेनत्सांग हर्षवर्धन के काल में भारत आया था।

हर्षवर्धन ने राजधानी थानेश्वर से कन्नौज [उत्तर प्रदेश] स्थानान्तरित की।

कुंभ मेले का शुभारम्भ हर्षवर्धन ने किया।

फ़ाह्यान प्रथम विदेशी यात्री था जिसने भारत की प्रथम यात्रा की थी।

शून्य की खोज आर्य भट्ट ने की थी।

अंकोरवाट का मंदिर कम्बोडिया में स्थित है।

नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म दर्शन के लिए प्रसिद्ध है।

देवनागरी लिपि का प्राचीनतम रूप ब्राह्मी लिपि है।

अभिलेखों का अध्ययन इपिग्राफी से होता है।

सिकंदर अरस्तु का शिष्य था।

FAQ SECTION

मगध के सबसे प्राचीन वंश संस्थापक कौन था?

बृहद्रथ

हर्यक वंश का संस्थापक था?

बिम्बिसार

वृहद्रथ का पुत्र था?

जरासंध

बिंबिसार ने मगध पर शासन किया?

करीब 52 वर्षो तक

शिशुनाग वंश का अंतिम राजा था?

नंदिवर्धन

नंद वंश का संस्थापक था?

महापद्मनंद

नंद वंश का अंतिम शासक था?

घनानन्द

सिकन्दर का जन्म हुआ?

356 ई. पूर्व

सिकंदर का सेनापति था?

सेल्यूकस निकेटर

मौर्य वंश का संस्थापक कौन हैं?

चंद्रगुप्त मौर्य

मौर्य साम्राज्य के पतन के क्या कारण थे?

अशोक की धार्मिक नीति।
सेना और नौकरशाही पर भारी व्यय।
प्रांतों में विरोधी शासन।
उत्तर-पश्चिम सीमा की उपेक्षा।

मौर्य सम्राट का प्रथम शासक कौन था?

चंद्रगुप्त मौर्य, मौर्य वंश का प्रथम राजा और संस्थापक माना जाता है।

चंद्रगुप्त मौर्य के कितने पुत्र थे?

चन्द्रगुप्त के 2 पुत्र थे चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी दुर्धरा थी, जिनसे उन्हें बिंदुसार नाम का बेटा हुआ, चन्द्रगुप्त की दूसरी पत्नी हेलेना थी, जिनसे उन्हें जस्टिन नाम का पुत्र हुआ।

यह भी पढ़ेमध्यकालीन भारत (Medieval India)

दोस्तों, आज हमने आपको मगध साम्राज्य का विस्तार। Magadha Empire In Hindi, सिकन्दर कौन था?, मौर्य सामाज्य का इतिहास बताइए, बिन्दुसार कौन था, अशोक कौन था, गुप्त साम्राज्य का विस्तार के बारे मे बताया, आशा करता हूँ आपको यह Article बहुत पसंद आया होगा और आपको इससे बहुत कुछ सिखने को भी मिला होगा, तो दोस्तों मुझे अपनी राय कमेंट करके बताया, ताकि मुझे और अच्छे-अच्छे आर्टिकल लिखने का सौभग्य प्राप्त हो, मुझे आपके कमेंट का इंतजार रहेगा !धन्यवाद् !

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