महाजनपद काल का इतिहास (Mahajanpad kal in hindi)

हेलो दोस्तों, हमारे इस Blog में आपका स्वागत है, हमारे इस ब्लॉग में आपको इतिहास, महाजनपद काल (Mahajanpad kal in hindi) का इतिहास, जैन धर्म (Jainism) का इतिहास, बौद्ध धर्म (Buddhism) का इतिहास आदि पढ़ने को मिलेगा !

महाजनपद काल का इतिहास (Mahajanpad kal in hindi)


जैन धर्म का इतिहास (Jain dharm ka Itihas)

 

jain dharm ka itihas
जैन धर्म (Jainism)

 

जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर ऋशभदेव थे, जैनधर्म के 23 वे तीर्थकर पाशर्वनाथ थे !

महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वे एवं अंतिम तीर्थकर हुए !

इनका जन्म 540 ई. पूर्व में कुण्डग्राम (वैशाली) में हुआ था !

इनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के सरदार थे !

महावीर स्वामी का की पत्नी का नाम यशोदा एवं पुत्री का नाम अनोज्जा प्रियदर्शनी था !

इनका बचपन का नाम वर्द्धमान था !

इन्होने अपना उपदेश प्राकृत [ अर्धमागधी ] भाषा में दिया !

महावीर के अनुयायियों को मूलतः निग्रंथ कहा जाता था !

इनके प्रथम अनुयायी उनके दामाद जामिल बने !

महावीर ने अपने शिष्यों को 11 गणधरो में विभाजित किया था !

इनके त्रिरत्न है – 1. सम्यक दर्शन 2. सम्यक ज्ञान 3. सम्यक आचरण !

इस धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है !

महावीर पुनर्जन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करते थे !

जैन धर्म ने अपने आध्यात्मिक विचारो को सांख्य दर्शन ग्रहण किया !

इस धर्म मानने वाले कुछ राजाओ के नाम – उदयिन , चन्द्रगुप्त मौर्य , खारवेल, चंदेल शासक !

खजुराहो में जैन मंदिरो का निर्माण चंदेल शासको द्वारा किया गया !

जैन तीर्थकरों की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र में है !

जैन धर्म में आत्मा की मान्यता है !


बौद्ध धर्म का इतिहास (Bodh dharm in hindi)

 

महाजनपद काल (Mahajanapada Period in hindi)
बौद्ध धर्म ( Buddhism )

 

बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे इन्हे एशिया का ज्योतिपुज्ज कहा जाता है !

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई. पूर्व में कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था !

इनके पिता शुद्धोधन शाक्य गण के मुखिया थे !

गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था !

इनका विवाह 16 वर्ष की अवस्था में यशोधरा साथ हुआ !

इनके पुत्र का नाम राहुल था !

सांसारिक समस्याओ से व्यवस्थित होकर सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की अवस्था में गृह-त्याग किया !

जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिस्क्रमण कहा गया है !

ग्रह-त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के अलारकलाम से सांख्य दर्शन की शिक्षा ग्रहण की !

अलारकलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए ! अलारकलाम के बाद सिद्धार्थ ने राजगीर के रुद्रकरामपुत्त से शिक्षा ग्रहण की !

ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए और वह स्थान बोधगया कहलाया !

बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिसे बौद्ध ग्रंथो में धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया है !

गौतम बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा पालि में दिए !

बुद्ध ने अपने उपदेश कौशल, वैशाली, कौशाम्बी व अन्य राज्यों में दिए !

बौद्ध धर्म से सम्बन्धित

सर्वाधिक उपदेश कौशल देश  राजधानी श्रावस्ती में दिए !

इनके प्रमुख अनुयायी शासक थे – बिम्बिसार, प्रसेनजित व उदयिन !

बौद्धधर्म के बारे में हमे विशद ज्ञान त्रिपिटक – विनयपिटक, सूत्रपिटक, अभिदम्भपिटक से प्राप्त होता है !

तीनो पिटक की भाषा पालि है !

बौद्ध धर्म मूलतः अनीश्वरवादी है इसमें आत्मा की परिकल्पना भी नहीं है !

इस धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है !

तृष्णा को क्षीण हो जाने की अवस्था को ही बुद्ध ने निर्वाण कहा है !

” विश्व दुःखो से भरा है ” का सिंद्धान्त बुद्ध ने उपनिषद से लिया !

बुद्ध के अनुयायी 2 भागों में विभाजित थे – 1. भिक्छुक 2. उपासक !

बौद्ध धर्म के त्रिरत्न है – बुद्ध , धम्म एवं संघ !

अनीश्वरवाद के सम्बन्ध में बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म से समानता है !

भारत में उपासना की जाने वाली प्रथम मूर्ति सम्भवतः बुद्ध की थी !


यह भी पढ़े – मगध साम्राज्य (Magadha Empire)


16 महाजनपदों के नाम व उनकी राजधानी


वंश, साम्राज्य एवं राजधानियाँ


प्रमुख मंदिर एवं उनकी स्थिति व निर्माण


 

दोस्तों, आज हमने आपको  महाजनपद काल (Mahajanpad kal in hindi) का इतिहास, जैन धर्म ( Jainism ) का इतिहास, बौद्ध धर्म ( Buddhism ) का इतिहास के बारे मे बताया, आशा करता हूँ आपको यह Article बहुत पसंद आया होगा और आपको इससे बहुत कुछ सिखने को भी मिला होगा, तो दोस्तों मुझे अपनी राय कमेंट करके बताया, ताकि मुझे और अच्छे-अच्छे आर्टिकल लिखने का सौभग्य प्राप्त हो, मुझे आपके कमेंट का इंतजार रहेगा  !धन्यवाद् !

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