मोनेरा जगत किसे कहते है, एवं इसके क्या क्या लक्षण है (Monera Jagat Kise Khahte Hai)

हेलो दोस्तों, हमारे इस Blog में आपका स्वागत है, हमारे इस ब्लॉग में आज हम आपको मोनेरा जगत किसे कहते है,। Monera Jagat in hindi एवं इसके क्या क्या लक्षण है , मोनेरा जगत का वर्गीकरण इन सबके बारे में बताएंगे, तो चलिए दोस्तों शुरू करते है –

 

मोनेरा जगत । Monera Jagat in Hindi
मोनेरा जगत । Monera Jagat in Hindi

मोनेरा जगत किसे कहते है? । Monera Jagat in hindi

इस जगत के जीव उन सभी स्थानों पर पाए जाते हैं जहां जीवन की थोड़ी भी संभावना मौजूद है जैसे – मिट्टी, जल, वायु, रेगिस्तान आदि !

मोनेरा जगत के प्रमुख लक्षण लिखिए?Monera Jagat ke Lakshan

मोनेरा जगत के जीव धारियों के मुख्य लक्षण निम्नलिखित है

1. इनमें प्रोकैरियोटिक प्रकार का कोशकीय संगठन पाया जाता है

2. कोशिका में अनुवांशिक पदार्थ किसी झिल्ली द्वारा बंधा नहीं होता बल्कि जीव द्रव्य में बिखरा पड़ा रहता है

3. इनकी कोशिका भित्ति अत्यंत सुदृढ़ रहती है इनमें पोलीसेकेराइएड के साथ एमिनो अम्ल भी होता है

4. इनमे केंद्रीय झिल्ली अनुपस्थित होती है

5. इनमें माइटोकॉन्ड्रिया गोल्जिकाय तथा रिक्तिका भी अनुपस्थित होती है

6. यह प्रकाशसंश्लेषी, रसायनसंश्लेषी या परपोषी होते हैं

7. कुछ सदस्यों में वायुमंडलीय नाइट्रोजन की स्त्रीकरण की क्षमता भी पाई जाती है

मोनेरा जगत का वर्गीकरण लिखिए?Monera Jagat ka Vargikaran

मोनेरा जगत को 4 भागों में विभाजित किया गया है !

1. जीवाणुJivanu

यह वास्तव में पौधे नहीं होते हैं इनकी कोशिका भित्ति का रासायनिक संगठन पादप कोशिका के रासायनिक संगठन से बिल्कुल भिन्न होता है यद्यपि कुछ जीवाणु प्रकाश संश्लेषण करने में सक्षम होते हैं लेकिन उनमें उपस्थित बैक्टीरियो क्लोरोफिल पौधों में उपस्थित क्लोरोफिल से बिल्कुल भिन्न होता है

2. एक्टीनोमाइसिटीज़Actinomycetes

इन्हे कवकसम जीवाणु भी कहते हैं यह वह जीवाणु है जिनकी रचना कवक जाल के समान शाखित होती है पहले इन्हे कवक माना जाता था परंतु प्रोकैरियोटिक कोशिकीय संगठन के कारण इन्हे अब जीवाणु माना जाता है

3. आर्कीबैक्टीरियाArchaebacteria

ऐसा माना जाता है कि यह प्राचीनतम जीव धारियों के प्रतिनिधि है इसलिए इसका नाम आर्की अर्थात बैक्टीरिया रखा गया है इसलिए इन्हें प्राचीनतम जीवित जीवाश्म भी कहा जाता है जिन परिस्थितियों में यह निवास करते हैं उनके आधार पर आर्किबैक्टेरिया को तीन समूहों में विभाजित किया गया है

1. मेथेनोजोन

2. हेलोफाइल्स

3. थर्मोएसिडोफिल्स

4. साइनोबैक्टीरियाCyanobacteria

सायनोबैक्टीरिया प्रकाश संश्लेषी जीवधारी होते हैं इन्हें पृथ्वी का सफलतम जीवधारियों का समूह माना जाता है संरचना के आधार पर इनकी कोशिका की मूल संरचना सेवालों की अपेक्षा जीवाणु से अधिक समानता रखते हैं सायनोबैक्टीरिया को नील नील हरित शैवाल के नाम से भी जाना जाता है यह कवक से लेकर साइकस तक अनेक जीवधारियों के साथ सहजीवी के रूप में रहते है!

FAQ SECTION

मोनेरा जगत में कौन-कौन से जीव आते हैं?

इस जगत में प्रोकैरियोटिक जीव अर्थात् जीवाणु (Bacteria), सायनोबैक्टीरिया और आर्कीबैक्टीरिया आदि शामिल हैं|

मोनेरा की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है?

मोनेरा की कोशिका भित्ति का निर्माण सेलूलोज, पेक्टोज तथा अन्य निर्जीव पदार्थों द्वारा होता है। कोशिका भित्ति में 2 परतें होती हैं जिनके मध्य में लमेला नामक दीवाल होती है। कोशिका भित्ति का मुख्य कार्य कोशिका को आकृति प्रदान करना एवं Protoplasm की रक्षा करना है।

आर्की बैक्टीरिया क्या है?

ऐसा माना जाता है कि यह प्राचीनतम जीव धारियों के प्रतिनिधि है इसलिए इसका नाम आर्की अर्थात बैक्टीरिया रखा गया है इसलिए इन्हें प्राचीनतम जीवित जीवाश्म भी कहा जाता है जिन परिस्थितियों में यह निवास करते हैं

कोशिका का कौन सा भाग पारगम्य है?

कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्यूलोज की बनी होती है। यह पारगम्य होती है। सेल्यूलोज एक जटिल पदार्थ है जो पादप कोशिकाओं को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है।

मध्य पटलिका किसकी बनी होती है?

यह कैल्शियम तथा मैग्नीशियम पेक्टिन और प्रोटीन से बनी होती हैं।

पैरामीशियम कौन सी कोशिका है?

पैरामिसियम एक कोशिकीय प्रोटोजोआ संघ का जंतु है। इसमें सत्य केन्द्रक का अभाव होता है। यह सिलिया की सहायता से गति करता है।

पाँच जगत वर्गीकरण के जन्मदाता कौन है?

आर. एच. व्हिटेकर ने सन् 1959 में पाँच जगत के वर्गीकरण उपाधि स्थापित किए । वे हैं – मोनेरा, प्रोटिस्टा , फंजाई, प्लांटी‌ और एनीमेलिया।

कोशिका झिल्ली के क्या कार्य है?

यह कोशिका की आकृति या आमाप का निर्माण करती है एवं जीव द्रव्य की रक्षा करती है। अन्तर कोशिकीय विसरण एवं परासरण की क्रिया को नियंत्रित करने के साथ-साथ यह विभिन्न रचनाओं के निर्माण में भी सहायक है।

कोशिका का कौन सा अंग बिजलीघर है?

माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का बिजली घर कहते है। माइटोकाण्ड्रिया में एन्जाइम होते है जो भोजन पदार्थो का ऑक्सीकरण करके ऊर्जा का निर्माण करते है, जो A.T.P. के रूप में एकत्र होती है।

कौन सा कोशिकांग केवल पशु कोशिका में पाया जाता है?

ऐसा केवल एक ही अंग है , अर्थात राइबोसोम है जो दोनों प्रोकरियोटिक व यूकेरियोटिक दोनों कोशिकाओं में पाया जाता है।

यह भी पढ़ें – विषाणु (Virus) क्या है

दोस्तों, आज हमने मोनेरा जगत किसे कहते है, (Monera Jagat in hindi)एवं इसके क्या क्या लक्षण है , मोनेरा जगत का वर्गीकरण , इन सबके बारे में बताया, और उम्मीद है आपको यह आर्टिकल बहुत अच्छा लगा होगा, और कुछ न कुछ सिखने को जरूर मिला होगा, तो दोस्तों कमेंट करके कमेंट करके अपनी राय जरूर बताये की आपको यह आर्टिकल कैसा लगा ! हमें आपके कमेनेट का इंतजार रहेगा ! धन्यवाद !

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