प्रोटोजोआ क्या है? (Protozoa in hindi)

हेलो दोस्तों, हमारे ब्लॉक में आपका स्वागत है, आज हम जानेंगे की प्रोटोजोआ क्या है? (Protozoa in hindi) और प्रोटोज़ोआ के लक्षण, प्रोटोजोआ का वर्गीकरण जानेंगे और मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र (Malaria Parasite Life Cycle in Hindi) क्या है यह भी जानेंगे। तो चलिए शुरू करते है!

प्रोटोजोआ (Protozoa in hindi)

 

प्रोटोजोआ क्या है? (Protozoa in hindi)
प्रोटोजोआ क्या है? (Protozoa in hindi)

प्रोटोजोआ क्या है? (Protozoa in hindi)

प्रोटोजोआ सबसे आदिकालीन एवं साधारण जंतुओं का संघ है, जिसमें एक कोशिका जंतु को रखा जाता है, इस समूह के अंतर्गत आने वाले जंतु एक केंद्रीय या बहूकेंद्रीय, विषमपोषी होते हैं प्रोटोजोआ नाम गोल्डफस द्वारा दिया गया ! एक कोशिका होने के बावजूद भी प्रोटोजोआ जीवन की सभी क्रियाए तथा पाचन, उत्सर्जन एवं प्रजनन उसी तरह सुचारू रूप से कर लेते हैं, प्रोटोजोआ संघ के अंतर्गत लगभग 80000 जातियां आती है

प्रोटोजोआ के लक्षण (Protozoa Symptoms in hindi)

1. यह अत्यंत सूक्ष्म, स्वतंत्रजीवी, सहजीवी परजीवी  होते हैं

2. एक कोशिकीय शरीर का जीव द्रव्य, बाह्य द्रव्य तथा अन्तः द्रव्य में विभेदित होता है

3. प्रचलन कूटपाद पक्षमो या कशाभिका द्वारा होता है

4. यह एक केन्द्रकीय या बहुकेन्द्रकीय होते हैं

5. संकुचनशील रसधानी मृदुजलीय प्रोटोजुआ में ही पाया जाता है 

6. इस समुदाय के जीव कलिकायन द्विविखण्डन बहुविखण्डन कभी कभी सयुग्मन के द्वारा प्रजनन करते है

प्रोटोजोआ का वर्गीकरण (Classification of Protozoa in Hindi)

वर्ग-1 – जूफलेजेलेट्स

1. प्रचलन के लिए एक या अधिक चाबुक कशाभिका होती है
2. इनमें कूटपाद मौजूद रहता है और नहीं भी
3. जीव यूग्लीना संरचना वाले तथा पर्णहरित रहित होते है
4. इसमें विषमपोषी पोषण, अवशोषण या PHAGOCYTOSIS क्रिया के द्वारा होता है
5. यह निश्चित आकृति वाले होते हैं तथा लंबवत विखंडन की क्रिया के द्वारा अलैंगिक प्रजनन करते हैं
6. जीव स्वतंत्रजीवी या परजीवी तथा सहजीवी होते हैं, उदाहरण – ट्रिपैनोसोमा, लिश्मानिया, ट्राइकोनिम्फा

वर्ग-2 – सार्कोडाइन्स

1. प्राय स्वतंत्रजीवी होते हैं
2. प्रचलन फुटपाथ द्वारा होता है
3. आकार सामान्य परिवर्तनशील होता है
4. इनके शरीर पर पेलिकल नहीं पाया जाता है लेकिन कुछ सार्कोडाइन्स के चारो तरफ से सिलिका का कवच स्थापित होता है उदाहरण – अमीबा, रेडिएलेरिया

वर्ग-3 – स्पोरोजोआ

1. इनमें प्रचलन अंग नहीं होते हैं

2. सभी परजीवी होते हैं

3. जीवन चक्र में बीजाणु जनन पाया जाता है

4. कायिक अवस्था में अमीबा की तरह दिखलाई देते हैं

उदाहरण – प्लाज्मोडियम

वर्ग-4 – सिलीएटा

1. इस वर्ग के जीवो में सिलिया पूरे शरीर या इसके कुछ भागों पर पाए जाते हैं

2. इनकी कोशिकाओं में दो असमान स्वभाव वाले केंद्रक उपस्थित होते हैं

3. इनके शरीर में पेलिकल आवरण के रूप में उपस्थित होता है

4. गुरु केंद्रक में स्पष्ट गुणसूत्र नहीं पाए जाते हैं बल्कि इसमें अनुवांशिक पदार्थ गुच्छो के रूप में उपस्थित होते हैं

5. प्रजनन से संबंधित समस्त सक्रियता का निर्धारण लघु केन्द्रक करता है इसमें गुणसूत्र के विशेष सेट पाए जाते हैं

उदाहरण – पैरामीशियम

सहजीवी प्रोटोजोआ –

दो जीवो का परस्पर फायदे के लिए साथ होने की प्रक्रिया सहजीविता कहलाते हैं प्रोटोजोआ की कुछ जातियाँ सहजीवी स्वरूप में अपना जीवन चक्र पूरा करती है जैसे – दीमक की आहार नाल में ट्राईकोनिंबा नामक प्रोटोजोआ सहजीवी के रूप में होता है यह प्रोटोजोआ सैलूलोज को विघटितकरने वाले एंजाइम का निर्माण कर दिमाग को उपलब्ध करता है तथा बदले में उसे भोजन तथा जीवित रहने हेतु स्थल प्राप्त करता है यह प्रोटोजोआ इस प्रकार दीमक को लकड़ी खाने तथा उसे शीघ्रता से पचाने की शक्ति प्रदान करता है

परजीवी प्रोटोजोआ

प्रोटोजोआ समूह के कुछ जीव परजीवी भी होते हैं अतः दूसरे सजीव से पोषण प्राप्त करते हैं परजीवता के क्रम में पोषक बीमारी का शिकार हो जाता है प्रोटोजोआ के सभी वर्गों के कुछ जीव परजीवी के रूप में पाए जाते हैं लेकिन वर्ग स्पोरोजोआ के प्राय सभी जीव दूसरे जीव पर परजीवी के रूप में पाए जाते हैं इसी कारण इसे परजीवी प्रोटोजोआ वर्ग भी कहते हैं ऐसे परजीवी में उसके शरीर के चारों तरफ आवरण के रूप में स्थित पैलिकल उसे पोषक के शरीर में या उससे स्त्रावित होने वाले एन्ज़ाइम से प्रति रक्षा करता है यदि परजीवी का जीवन चक्र दो जीवो में पूर्ण होता है तो एक जीव वाहक का कार्य करता है उदाहरण – मलेरिया परजीवी को मनुष्य के शरीर में स्थापित करने के लिए मादा एनाफिलीज वाहक का कार्य करती है!

मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र (Malaria Parasite Life Cycle in Hindi)

 

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मलेरिया परजीवी का जीवन चक्र (Malaria Parasite Life Cycle in Hindi)

मनुष्य प्लाज्मोडियम का प्राथमिक पोषक होता है मनुष्य के लाल रक्त कणिकाओं में इसकी अमीबॉयड अवस्था पाई जाती है जिसमें अगुणित रचना गेमेटोसाइट्स पैदा होती है मादा मच्छर जब मनुष्य का रक्त चूसती है तब परजीवी रक्त के साथ मच्छर के अमाशय में पहुंच जाता है तथा विकसित होकर वहां युग्मक का निर्माण करता है नर तथा मादा युग्मक निषेचन के पश्चात आपस में मिलकर युग्मनज बना देते हैं जो कि अमाशय की दीवार में सिस्ट के रूप में रूपांतरित हो जाता है सिस्ट से अनेक स्पोरोजोइट बनते हैं जो कि मच्छर की लार ग्रंथि में एकत्रित होते रहते हैं जब इस प्रकार की मादा एनाफिलीज मच्छर किसी स्वस्थ मनुष्य का रक्त चूसती है तो स्पोरोजोइट मच्छर के लार से होकर मनुष्य के रक्त में पहुंच जाते हैं तथा अमीबॉयड अवस्था में परिणित हो जाते हैं लाल रुधिर कणिकाओं में इनका बार-बार विखंडन होता है जिसके कारण जहरीला पदार्थ रक्त में मिलता रहता है जिसके परिणाम स्वरूप ठंड लगकर कपकपी के साथ तेज बुखार होता है जिसे मलेरिया बुखार कहते हैं!

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